बैराज से छूटा लाखों क्यूसेक पानी, नदी के बहाव को मापने का वैज्ञानिक तरीका और क्यूसेक का मतलब

Water Flow Measurement Formula Explained: बैराज से छूटा लाखों क्यूसेक पानी! जानिए बिना किसी बर्तन के आखिर कैसे मापा जाता है नदी का बहता हुआ जल और क्या है इसका वैज्ञानिक आधार

नई दिल्ली/पटना। जब भी देश के किसी हिस्से में बाढ़ का संकट आता है या नेपाल द्वारा गंडक बैराज पर पानी छोड़ा जाता है, तो हम समाचारों में लगातार एक शब्द सुनते हैं कि "बैराज से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया" या "नदी में तीन लाख क्यूसेक पानी बह रहा है।" यह सुनकर सामान्यतः मन में यह सवाल उठता है कि नदी का पानी तो लगातार बह रहा है, तो फिर बिना किसी बर्तन या बड़े तराजू के जल संसाधन विभाग के एक्सपर्ट इस बहते हुए पानी की सटीक मात्रा को कैसे माप लेते हैं? एक ज़िम्मेदार न्यूज़ पोर्टल के रूप में आज 'भारत को जानें' के पाठकों के लिए हम इस तकनीकी तरीके को सबसे सरल उदाहरण के साथ समझाने जा रहे हैं।
सबसे पहले समझिए: क्या है 'क्यूसेक' (Cusec) का सीधा मतलब?
बहुत से लोग समझते हैं कि क्यूसेक का मतलब पानी का कुल वजन या लीटर होता है, लेकिन तकनीकी भाषा में यह पानी की कुल मात्रा नहीं बल्कि पानी के बहने की रफ़्तार (Flow Rate) को दर्शाता है। क्यूसेक अंग्रेजी के दो शब्दों से मिलकर बना है—Cubic Feet per Second यानी "घन फीट प्रति सेकंड।"
इसे एक सरल घरेलू उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए आपके घर में पानी की एक पाइप लगी है। यदि इस पाइप से "1 क्यूसेक" पानी बह रहा है, तो इसका सीधा अर्थ यह है कि उस पाइप के मुंह से हर एक सेकंड में 28.31 लीटर पानी बाहर निकल रहा है। अब यदि गंडक बैराज से 1 lakh क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, तो इसका अर्थ है कि हर एक सेकंड के भीतर उस बैराज से 28 लाख 31 हज़ार लीटर पानी आगे की तरफ बढ़ रहा है। यही कारण है कि यह पानी मैदानी इलाकों में आते ही जलभराव की स्थिति पैदा कर देता है।
बिना किसी बर्तन के बैराज पर कैसे मापा जाता है नदी का पानी?
लगातार बहती नदी के पानी को मापने के लिए जल संसाधन विभाग के इंजीनियर Area-Velocity Method यानी "क्षेत्रफल और गति विधि" का इस्तेमाल करते हैं। इसके मुख्य दो चरण होते हैं:
पहला चरण है रास्ता मापना (Area)। बैराज या बांध के जितने भी गेट होते हैं, उनका आकार (चौड़ाई और गहराई) पहले से तय होता है। जब कोई गेट ऊपर उठाया जाता है, तो इंजीनियर स्केल से देख लेते हैं कि गेट कितना ऊपर खुला है और पानी कितनी ऊंचाई को छू रहा है। इससे उन्हें पता चल जाता है कि पानी के बाहर निकलने का रास्ता कुल कितने वर्ग फीट का है।
दूसरा चरण है पानी की रफ़्तार (Velocity)। पानी कितनी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, इसे मापने के लिए नदी के बीच में 'करंट मीटर' (Current Meter) या आधुनिक ADCP नामक एक डिजिटल यंत्र डाला जाता है। यह यंत्र पानी के भीतर ध्वनि तरंगें छोड़कर यह बता देता है कि पानी कितने फीट प्रति सेकंड की स्पीड से दौड़ रहा है।
इसके बाद इंजीनियर एक तय फॉर्मूले का उपयोग करते हैं—पानी का बहाव (क्यूसेक) = गेट का खुला हुआ रास्ता (वर्ग फीट) × पानी की रफ़्तार (फीट प्रति सेकंड)। इन दोनों को गुणा करते ही कंप्यूटर स्क्रीन पर क्यूसेक का बिल्कुल सटीक आंकड़ा सामने आ जाता है।
'क्यूसेक' और 'टीएमसी' (TMC) का अंतर भी जान लीजिए
लेख में यह जानना भी जरूरी है कि खबरों में क्यूसेक के साथ-साथ कई बार TMC शब्द भी आता है। इन दोनों में बहुत बड़ा अंतर है:
  • क्यूसेक (Cusec): यह बहते हुए पानी की गति है। जैसे आपकी मोटरसाइकिल की स्पीड होती है कि वह 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही है।
  • टीएमसी (TMC - Thousand Million Cubic Feet): यह एक जगह जमा पानी का कुल स्टॉक होता है। जैसे आपकी मोटरसाइकिल का पेट्रोल टैंक होता है जिसकी क्षमता 15 लीटर फिक्स होती है। बांधों या बड़े जलाशयों में कुल कितना पानी जमा है, उसे हमेशा टीएमसी में मापा जाता है। 1 टीएमसी पानी का मतलब होता है लगभग 2,831 करोड़ लीटर पानी का एक जगह जमा होना।
'भारत को जानें' न्यूज़ पोर्टल की विशेष अपील
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